Question
Option 3 : एक छोटी-सी चूक से भी साक्ष्य का अपरिवर्तनीय रूप से विकृत हो जाना
Detailed Solution
सही उत्तर एक छोटी-सी चूक से भी साक्ष्य का अपरिवर्तनीय रूप से विकृत हो जाना है।
Question:
निम्न गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए — सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में अपराध की प्रकृति और उसके साक्ष्यों का स्वरूप दोनों ही मौलिक रूप से परिवर्तित हो चुके हैं। पारंपरिक अपराधों में जहाँ भौतिक साक्ष्य — रक्त के धब्बे, अंगुलियों के निशान अथवा हथियार — जाँच की आधारशिला होते थे, वहीं साइबर अपराधों में साक्ष्य अदृश्य बिटों और बाइटों के रूप में विद्यमान होते हैं। डिजिटल साक्ष्य की सबसे बड़ी विशेषता उसकी नाजुकता है: एक गलत कमांड, बिजली का एक झटका या कोई सामान्य-सी प्रणाली प्रक्रिया भी मूल साक्ष्य को अपरिवर्तनीय रूप से विकृत कर सकती है। अतः फॉरेंसिक विशेषज्ञ 'राइट ब्लॉकर' जैसे उपकरणों से मूल माध्यम की बिट-स्ट्रीम प्रतिलिपि तैयार करते हैं और विश्लेषण केवल इसी प्रतिलिपि पर करते हैं। मूल साक्ष्य की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने हेतु हैश मान — प्रायः SHA-256 एल्गोरिथ्म से प्राप्त 64-अंकीय हेक्साडेसिमल श्रृंखला — का प्रयोग किया जाता है; यदि प्रतिलिपि का हैश मूल के हैश से मेल खाता है तो न्यायालय के समक्ष यह सिद्ध होता है कि साक्ष्य के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। साथ ही साक्ष्य की निरंतरता — जिसे 'चेन ऑफ कस्टडी' कहा जाता है — का अटूट दस्तावेज़ीकरण अनिवार्य है, क्योंकि टूटी हुई श्रृंखला न्यायालय में साक्ष्य को अस्वीकार्य बना सकती है। / गद्यांश के अनुसार, डिजिटल साक्ष्य की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
Correct Answer: एक छोटी-सी चूक से भी साक्ष्य का अपरिवर्तनीय रूप से विकृत हो जाना
गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि डिजिटल साक्ष्य की सबसे बड़ी विशेषता उसकी नाजुकता है — एक गलत कमांड, बिजली का झटका या सामान्य प्रणाली प्रक्रिया भी मूल साक्ष्य को विकृत कर सकती है। विकल्प (b) भ्रामक है क्योंकि गद्यांश में एन्क्रिप्शन का उल्लेख ही नहीं है; चुनौती नाजुकता है, एन्क्रिप्शन नहीं।