Question
Option 1 : वर्षा जल संचयन की आवश्यकता और उपाय
Detailed Solution
सही उत्तर वर्षा जल संचयन की आवश्यकता और उपाय है।
Question:
गद्यांश पढ़कर उत्तर दीजिए: "भारत में मानसूनी वर्षा का लगभग अस्सी प्रतिशत जल बिना उपयोग बहकर समुद्र में चला जाता है, जबकि अनेक शहर भूजल संकट से जूझ रहे हैं। वर्षा जल संचयन इस विरोधाभास का सीधा उत्तर है — छतों पर गिरने वाले जल को पाइपों द्वारा संग्रह टंकियों या पुनर्भरण गड्ढों तक पहुँचाना। तमिलनाडु में इसे भवनों हेतु अनिवार्य किए जाने के बाद चेन्नई का भूजल स्तर उल्लेखनीय रूप से सुधरा। विशेषज्ञों का मत है कि तालाबों और जोहड़ों का पुनरुद्धार भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि ये पारंपरिक संरचनाएँ पूरे गाँव की जल-सुरक्षा करती थीं। सबसे बड़ी बाधा तकनीक नहीं, जल-साक्षरता की कमी है — लोग वर्षा को आपदा मानते हैं, संसाधन नहीं। यदि प्रत्येक घर वर्षा की हर बूँद को संजोने लगे, तो जल संकट इतिहास बन सकता है।" गद्यांश का केंद्रीय विषय क्या है?
Correct Answer: वर्षा जल संचयन की आवश्यकता और उपाय
पूरा गद्यांश वर्षा जल के संचयन की आवश्यकता, उपायों और बाधाओं पर केंद्रित है; नदी-प्रदूषण, बाँध-निर्माण या समुद्री जल का इसमें उल्लेख ही नहीं है।