Question

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Answer (Detailed Solution Below)

Option 2 : प्रौद्योगिकी पुस्तकालयों की सहयोगी है तथा परंपरा और प्रौद्योगिकी का संतुलन आवश्यक है

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Detailed Solution

सही उत्तर प्रौद्योगिकी पुस्तकालयों की सहयोगी है तथा परंपरा और प्रौद्योगिकी का संतुलन आवश्यक है है।

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Question:

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए: सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में पुस्तकालयों का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। कभी पुस्तकालय केवल पुस्तकों के संग्रह-स्थल माने जाते थे, किंतु आज वे ज्ञान के डिजिटल केंद्र बनते जा रहे हैं। ई-पुस्तकों, ऑनलाइन पत्रिकाओं और डिजिटल अभिलेखागारों ने ज्ञान को घर-घर तक पहुँचा दिया है। परंतु इस क्रांति का दूसरा पहलू भी है — डिजिटल विभाजन। जिन समुदायों के पास इंटरनेट और स्मार्ट उपकरणों की सुविधा नहीं है, वे इस दौड़ में पीछे छूट जाते हैं। ऐसे में पुस्तकालयों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आधुनिक पुस्तकालय निःशुल्क इंटरनेट और कंप्यूटर सुविधा देने के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण भी देते हैं। प्रौद्योगिकी पुस्तकों की शत्रु नहीं, अपितु उनकी सहयोगी है — यह पुस्तकों को नए पाठकों तक पहुँचाने का सेतु है। अतः भविष्य में वही पुस्तकालय सफल होंगे जो परंपरा और प्रौद्योगिकी के बीच संतुलन साध सकेंगे। गद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है?

1.
पुस्तकें अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी हैं
2.
प्रौद्योगिकी पुस्तकालयों की सहयोगी है तथा परंपरा और प्रौद्योगिकी का संतुलन आवश्यक है
3.
डिजिटल विभाजन को समाप्त करना असंभव है
4.
सभी पुस्तकालयों को पूर्णतः डिजिटल हो जाना चाहिए

Correct Answer: प्रौद्योगिकी पुस्तकालयों की सहयोगी है तथा परंपरा और प्रौद्योगिकी का संतुलन आवश्यक है

गद्यांश में लेखक स्पष्ट करता है कि प्रौद्योगिकी पुस्तकों की शत्रु नहीं बल्कि सहयोगी है, और भविष्य के पुस्तकालयों की सफलता परंपरा तथा प्रौद्योगिकी के संतुलन पर निर्भर है — यही केंद्रीय भाव है।

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