Question
Option 2 : वर्षा जल का संचयन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है
Detailed Solution
सही उत्तर वर्षा जल का संचयन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है है।
Question:
एक दौर था जब भारत में बारिश के पानी को अमृत-तुल्य समझा जाता था। पुराने समय के तालाब, बावड़ियाँ और कुएँ केवल पानी के ठिकाने नहीं थे — वे गाँव के सामाजिक मेल-मिलाप के केंद्र भी थे। गाँव के तालाब की देखरेख पूरे ग्राम समुदाय की साझा ज़िम्मेदारी मानी जाती थी। परंतु नलकूपों और नगरीकरण के प्रसार के साथ पानी की इन पारंपरिक संरचनाओं की उपेक्षा होने लगी। इसके फलस्वरूप भूजल स्तर तेज़ी से नीचे गिरने लगा और अनेक क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत गंभीर हो गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्षा-जल का समुचित संचयन किया जाए तो अधिकांश शहरों की जल-आवश्यकता का बड़ा हिस्सा पूरा हो सकता है। छतों पर वर्षा-जल संग्रह, रिसाव-तालाब और पुनर्भरण-कुएँ जैसे उपाय आज पुनः प्रासंगिक हो उठे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि जल को मात्र संसाधन नहीं, अपितु साझी धरोहर समझा जाए — क्योंकि जल के अभाव में जीवन की कल्पना तक संभव नहीं है। इस अनुच्छेद का मुख्य संदेश क्या है?
Correct Answer: वर्षा जल का संचयन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है
गद्यांश परंपरागत जल संरचनाओं की उपेक्षा, गिरते भूजल स्तर और वर्षा जल संचयन के उपायों का वर्णन कर अंत में जल को साझी धरोहर मानने की बात कहता है; अतः इसका केंद्रीय भाव वर्षा जल संचयन की आवश्यकता है।