Question
Option 3 : पांडुलिपियों का संरक्षण एक सांस्कृतिक दायित्व है
Detailed Solution
सही उत्तर पांडुलिपियों का संरक्षण एक सांस्कृतिक दायित्व है है।
Question:
भारत की पांडुलिपि-विरासत विश्व की सबसे समृद्ध परंपराओं में गिनी जाती है। ताड़पत्र, भोजपत्र और हस्तनिर्मित कागज़ पर लिखे गए लाखों ग्रंथ आज भी मठों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में सुरक्षित हैं। इनमें चिकित्सा, खगोल, गणित, व्याकरण और दर्शन जैसे विषयों का अपार ज्ञान समाहित है। किंतु समय, नमी और कीट इन पांडुलिपियों के सबसे बड़े शत्रु हैं; उपेक्षा से ये अमूल्य धरोहरें धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं। इस संकट को देखते हुए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन ने हज़ारों पांडुलिपियों का डिजिटल प्रतिरूप तैयार कर उन्हें शोधकर्ताओं तक पहुँचाया है। डिजिटलीकरण से मूल प्रति को बार-बार छूने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे उसका आयुष्य बढ़ता है। साथ ही दूर-दराज़ का विद्यार्थी भी अब दुर्लभ ग्रंथों का अध्ययन घर बैठे कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षण का यह कार्य केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दायित्व है — क्योंकि पांडुलिपियों में हमारी सामूहिक स्मृति दर्ज है।
इस गद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है?
Correct Answer: पांडुलिपियों का संरक्षण एक सांस्कृतिक दायित्व है
गद्यांश पांडुलिपियों के ज्ञान-भंडार, उनके विनाश के संकट और डिजिटल संरक्षण के प्रयासों का वर्णन कर अंत में कहता है कि यह संरक्षण सांस्कृतिक दायित्व है; यही इसका केंद्रीय भाव है।