Question

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Answer (Detailed Solution Below)

Option 4 : हस्तलिखित पांडुलिपियों का संरक्षण ज्ञान-परंपरा की रक्षा है

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Detailed Solution

सही उत्तर हस्तलिखित पांडुलिपियों का संरक्षण ज्ञान-परंपरा की रक्षा है है।

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Question:

अपठित गद्यांश: भारत के अनेक मंदिरों, मठों और पुराने घरों के भंडारों में ताड़पत्रों तथा हस्तनिर्मित कागज़ पर लिखी हज़ारों पांडुलिपियाँ आज भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ी हैं। इनमें आयुर्वेद, ज्योतिष, व्याकरण और लोककथाओं का अमूल्य ज्ञान संचित है। नमी, दीमक और दशकों की उपेक्षा ने इनकी स्याही को धुँधला कर दिया है और पृष्ठ भुरभुरे हो चले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन पांडुलिपियों का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण और डिजिटलीकरण किया जाए तो आने वाली पीढ़ियों को अपनी ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा। कुछ संस्थाओं ने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर पांडुलिपियों को सूचीबद्ध करने का कार्य आरंभ भी किया है, परंतु संसाधनों की कमी इस गति को धीमा कर रही है। उपर्युक्त गद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है?

1.
पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण ही एकमात्र उपाय है
2.
आधुनिक पुस्तकें पांडुलिपियों से श्रेष्ठ हैं
3.
पांडुलिपियों का बाज़ार में विक्रय लाभदायक है
4.
हस्तलिखित पांडुलिपियों का संरक्षण ज्ञान-परंपरा की रक्षा है

Correct Answer: हस्तलिखित पांडुलिपियों का संरक्षण ज्ञान-परंपरा की रक्षा है

गद्यांश पांडुलिपियों में संचित ज्ञान, उनके क्षरण के कारणों और संरक्षण की आवश्यकता पर केंद्रित है; अतः केंद्रीय भाव ज्ञान-परंपरा की रक्षा हेतु संरक्षण है।

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