Question

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Answer (Detailed Solution Below)

Option 2 : वृक्षारोपण

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Detailed Solution

सही उत्तर वृक्षारोपण है।

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Question:

जल ही जीवन है — यह कथन केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि धरती के अस्तित्व का मूल सत्य है। भारत की नदियाँ सहस्राब्दियों से सभ्यता की धरोहर रही हैं; इन्हीं के तटों पर वेदों की रचना हुई, नगर बसे और संस्कृतियाँ पुष्पित हुईं। किंतु आज यही नदियाँ प्रदूषण के बोझ तले कराह रही हैं। औद्योगिक कचरा, अनुपचारित मलजल और प्लास्टिक ने गंगा-यमुना जैसी पावन नदियों को विषैला बना दिया है। जल संकट केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, अपितु राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न भी है, क्योंकि कृषि, उद्योग और पेयजल — तीनों की नींव जल पर टिकी है। समाधान कठिन नहीं, यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो। वर्षा-जल संचयन, नदियों के तटों पर वृक्षारोपण, उद्योगों में जल-पुनर्चक्रण और जन-जागरूकता — इन चार सूत्रों को अपनाकर हम नदियों को पुनः जीवन दे सकते हैं। याद रहे, प्रकृति से हम जितना लेंगे, उससे अधिक लौटाना ही सभ्य समाज की पहचान है। उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर बताइए — नदियों को विषैला बनाने में निम्नलिखित में से कौन-सा कारक उत्तरदायी नहीं है?

1.
औद्योगिक कचरा
2.
वृक्षारोपण
3.
अनुपचारित मलजल
4.
प्लास्टिक

Correct Answer: वृक्षारोपण

गद्यांश में नदियों के प्रदूषण के कारणों के रूप में औद्योगिक कचरा, अनुपचारित मलजल और प्लास्टिक का उल्लेख है। वृक्षारोपण प्रदूषण का कारण नहीं, बल्कि नदियों के पुनर्जीवन का एक सूत्र बताया गया है।

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