Question
Option 2 : परंपरागत जल-प्रबंधन के पुनरुद्धार की आवश्यकता
Detailed Solution
सही उत्तर परंपरागत जल-प्रबंधन के पुनरुद्धार की आवश्यकता है।
Question:
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिए। जल ही जीवन है — यह कथन केवल कहावत नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के जीवन-दर्शन का सार है। राजस्थान की बावड़ियाँ, गुजरात की वाव और दक्षिण भारत के प्राचीन तालाब इस बात के साक्षी हैं कि जल-प्रबंधन हमारी सभ्यता की रगों में बहता रहा है। चाँद बावड़ी की सीढ़ियाँ केवल स्थापत्य का चमत्कार नहीं, बल्कि वर्षा-जल को धरती की गोद में सहेजने की वैज्ञानिक पद्धति थीं। आज जब भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है और शहरों में पेयजल की किल्लत बढ़ रही है, तब इन परंपरागत संरचनाओं का पुनरुद्धार समय की माँग बन गया है। वर्षा-जल संचयन, तालाबों की खुदाई और नदियों के पुनर्जीवन जैसे उपाय केवल सरकारी योजनाएँ नहीं, बल्कि जन-भागीदारी के आंदोलन बनने चाहिए। जिस समाज ने कभी पानी को देवता माना, वही समाज यदि आज जल की एक-एक बूँद का सम्मान करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-संकट का भय समाप्त हो सकता है। गद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है?
Correct Answer: परंपरागत जल-प्रबंधन के पुनरुद्धार की आवश्यकता
गद्यांश का केंद्रीय भाव है कि परंपरागत जल-संरचनाओं के पुनरुद्धार और जन-भागीदारी से जल-संकट का समाधान संभव है।