Question

1.
2.
3.
4.
Answer (Detailed Solution Below)

Option 4 : वृक्ष और मानव सभ्यता का परस्पर संबंध तथा वर्तमान संकट

Advertisement

Detailed Solution

सही उत्तर वृक्ष और मानव सभ्यता का परस्पर संबंध तथा वर्तमान संकट है।

Key Points
Helpful?
PrepSnapprepsnap.in • Part -A

Question:

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिए। मानव सभ्यता के विकास में वृक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। आदिम युग में मनुष्य ने वृक्षों की छाया में आश्रय पाया, उनकी शाखाओं से औजार बनाए और फलों से क्षुधा शांत की। जैसे-जैसे सभ्यता आगे बढ़ी, वृक्ष केवल जीवन-निर्वाह का साधन न रहकर संस्कृति और दर्शन के प्रतीक बन गए। भारतीय दर्शन में वृक्ष को जीवन-चक्र का रूपक माना गया — जड़ें परंपरा से जोड़ती हैं, तना वर्तमान को थामे है और शाखाएँ भविष्य की संभावनाओं की ओर फैली हैं। आधुनिक युग में औद्योगीकरण ने वनों का अंधाधुंध दोहन किया, जिसका परिणाम जलवायु-असंतुलन के रूप में सामने आया। अब वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि हरित आवरण की रक्षा के बिना पृथ्वी का ताप-संतुलन बिगड़ जाएगा। यह विडंबना है कि जिस वृक्ष ने मनुष्य को सभ्य बनाया, उसी की उपेक्षा आज सभ्यता के लिए संकट बन गई है। गद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है?

1.
वृक्षों का आर्थिक महत्व और व्यापारिक उपयोग
2.
औद्योगीकरण से प्राप्त होने वाले लाभ
3.
भारतीय दर्शन का ऐतिहासिक परिचय
4.
वृक्ष और मानव सभ्यता का परस्पर संबंध तथा वर्तमान संकट

Correct Answer: वृक्ष और मानव सभ्यता का परस्पर संबंध तथा वर्तमान संकट

गद्यांश में वृक्षों के ऐतिहासिक योगदान, सांस्कृतिक प्रतीकत्व और वर्तमान में उनकी उपेक्षा से उत्पन्न संकट — इन तीनों का वर्णन है, अतः केंद्रीय भाव वृक्ष और मानव सभ्यता का परस्पर संबंध तथा वर्तमान संकट है।

Downloaded from PrepSnap (prepsnap.in)